Anant Prakash
7 years 11 months ago
दीपावली के दिन जब मैं अपनी कॉलोनी के फौजी दोस्तों को ड्यूटी पर देखा तो ,तो एक अजीब सी भावना जगी मन मे। बस कुछ लोग उन्हें शुभकामनाएं तो दे रहे थे ,पर उनके चेहरे की गंभीरता बहुत कुछ बयान कर रही थी । मैँ उस रात मिठाइयां लेकर उन्ही भाइयों के पास पहुचा । जो महसूस किया ,उसे शब्द देना मुश्किल है ,बस यही कह सकता हूँ सबसे अच्छी दीवाली रही । एक भाई ने कहा " साहब दिन के उजाले में तो कुछ लोग आए, बस फ़ोटो खिंचवाने या औपचारिकता निभाने , पर आप तो पूजा, दीवाली, परिवार छोड़कर इस वक़्त आये हैं,ये सबसे अच्छा लगा आज"
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