KirtidaVasavada
4 years 1 week ago
देश के सबसे पुराने एवं विश्वसनीय माध्यम आकाशवाणी के विभिन्न राज्यों के प्रादेशिक केन्द्रों को उन राज्यों के क्षेत्रीय केन्द्र के साथ मिलाने से - अंदाजन 60 जितने हंगामी उद्घोषक जो ईस कार्य से अपना जीवननिर्वाह कर रहे है, उनकी आर्थिक अस्थिरता और चिंताएँ बढ़ गयी है। यहाँ से मिल रहे आर्थिक भुगतान पर ये परिवार
काफी हद तक निर्भर है; अब उस सहारे को खोने से ऊन परिवारों के जीवनस्तर भी कहीं न कहीं प्रभावित जरूर होंगे। राजकोट केन्द्र से हमारे जुडाव का कारण हमारी अभिव्यक्ति का प्रस्तुति मंच भी है, एक एसा मंच जो हमें मौका बख्शता हैं यहाँ की भाषा और संस्कृति से सजे कार्यक्रम पेश करने का। सृजनात्मकता की संतुष्टि और कला की बदौलत मिली उस पहचानको खो देने के विचार मात्र से अंधकारमय शून्यता का डर हमें ग्रसित करने लगा है। केन्द्रों का महत्तम विलिनीकरण लोककला एवं संस्कृति को मृत:प्राय बना देगा। स्थानिक कलाकारों की अभिव्यक्ति का माध्यम और श्रोतागण ईस अमूल्य धरोहर से वंचित हो जाएंगे।
मान्यवर, ईन वजहों से हमारी ये दरखास्त है, ईस केन्द्र से जुड़े सहप्रसारण के जो प्रशासनिक निर्णय लिए गए हैं उन पर पुनर्विचार हो।
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