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24 सितंबर 2017 को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात के लिए अपने विचार साझा करें

आरंभ करने की तिथि :
Sep 13, 2017
अंतिम तिथि :
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टिप्पणियाँ (1)
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Parul Tripathi
8 साल 10 महीने पहले
आदरणीय प्रधान मंत्री जी,
मेरा सुझाव किसानो की समस्या को लेकर है मेरा सुझाव है कि यदि किसान खेती करने के साथ कुटीर उद्योग करे तो उन्हे उसका भी लाभ मिलेगा खेती करने के साथ मधुमक्खी पालन जैसे छोटे उद्योग भी करे घरो मे ही छोटी वस्तुओं को बनाए इसलिये यदि सरकार कर्ज माफ करने के बजाए ऐसी किसी योजना पर विचार करेगी तो हर बार कर्ज माफ करने से ज्यादा ऐसी योजना कारगर होगी और जब किसानो का विकास होगा तभी न्यू इंडिया का निर्माण होगा क्योंकि जो युवा बेरोजगार है उन्हे भी रोजगार का अवसर मिलेगा
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Sumit Tanwar
8 साल 10 महीने पहले
I firmly believe we should focus more on social entrepreneurship. To find innovative solutions to society’s most pressing social and environmental problems, centered on the concepts of seeking opportunity, connecting people and creating sustainable value. A combination of talent and diverse experiences backed by strong political will are the key ingredients to coming up with out-of-the-box solutions to address the many challenges we face as a developing country.
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sunil kumar
8 साल 10 महीने पहले
Dear PM,
I would request you to ask Software companies to set up some centers in North East, which will provide jobs for people there and set the development mill rolling. Software companies do not have the problem of transportation goods. Once this start automatically the region will flourish.
Regards
Sunil Kumar
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KUNDAN KUMAR_66
8 साल 10 महीने पहले
RESPECTED PM
I WANT TO KNOW WHY POLICE ARE SO FEARLESS AND THREATEN THE VICTIM WITHOUT ANY FEAR??
A SIMPLE PERSON CAN NOT DARE TO ASK ANY QUESTION AND HE KEEPS ON PLAYING HIS FLUTE. WHY???
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sujit lotlikar
8 साल 10 महीने पहले
sir,after independence there is partition ,no issue who stays peacefully,but voting rights should be to majority itself or exclude separated,for the world peace whole democratic nation under world platform,should dishonored all civil right of extremist religion for 50 or 60 yrs tenure,with strictly obey law & order of feeding nation,accordingly generation mindset will change to understand themselves and values of human-life.
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Sunil Haribhau Bhongane
8 साल 10 महीने पहले
भारतीय स्टेट बैंक ने पिछले 3 महीने में *Minimum Balance* ना रखने पर *₹235.06 करोड़ Fine* के रुप में वसूले हैं!
याद रखें ये *पैसा* सिर्फ *गरीब, मजदूर, छात्र, किसान और मेहनतकश जनता* के हैं... क्योंकि *अमीर* की समस्या *Minimum* नहीं *Miximum* है।
और साहब कहते हैं कि ये *गरीबों की सरकार है।*
🙏 सहमत हो तो आगे भेजो, और SBI का बहिष्कार करो 🙏
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KUNDAN KUMAR_66
8 साल 10 महीने पहले
POLICE NEEDS TO BE IMPROVED
THERE IS NO ONE TO LISTEN IF THE POLICE STATION IS EXPLOITING THE VICTIM
I THINK IT IS EASY TO TORTURE VICTIM AS HE OR SHE IS ALREADY UNDER TRAUMA AND THE BRIBE FACTOR CAN NOT BE RULED OUT
IN FACT POLICE ARE JUST LIKE GOONS WITH LICENSE
THEY HAVE NO TIME FOR LAW AND ORDER
THEY ARE BUSY IN COLLECTING MONEY FROM THE TRUCK AND OTHER INNOCENT PUBLIC
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Mohan Lal Sindhi
8 साल 10 महीने पहले
माननीय प्रधान मंत्री जी ,
नमस्कार , मेरे सुझाव संलग्न है |
mygov_150589320444474931.pdf
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KUNDAN KUMAR_66
8 साल 10 महीने पहले
I WENT TO POLICE STATION AND COMPLAIN ABOUT THE HARASSMENT I WAS UNDERGOING DUE TO THE RESISTANCE WE POSED BEFORE THEM.
ONE DAY WHEN I OPPOSED HIS ABUSIVE BEHAVIOUR THEN HE ALONG WITH THE FAMILY CAME TO MY HOME TO FIGHT DURING WHICH I WAS ROBBED OF MY MOBILE AND MY MOTHER ALONG WITH ME GOT INJURED
I WENT TO POLICE STATION BUT TO OUR SURPRISE THE ACCUSED WAS THERE BEFORE US AND IT WAS SHOCKING THAT THE POLICE STARTED THREATENING US WITH COUNTER CASE FACTOR WITHOUT ANY INVESTIGATION..
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KUNDAN KUMAR_66
8 साल 10 महीने पहले
POLICING IN INDIA IS SO CORRUPT THAT I THEY GET A CHANCE THEN THEY WOULD NOT LET THE COMPLAINANT RETURN ALIVE TO THEIR RESIDENCE FROM POLICE STATION ALIVE
NEARLY EVERYONE IS READY TO CUT THEIR SHARE OF FLESH FROM THE VICTIM.
THEY ARE NOT CONCERNED ABOUT LAW AND ORDER
WHAT THEY ARE CONCERNED IS THE AMOUNT OF MONEY THEY CAN EXHORT FROM THE VICTIM DEPENDING UPON THEIR SITUATION BY THREATENING WITH THE FACTOR OF COUNTER CASE
IS THEIR NO VALUE OF a victiS' SUFFERING
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