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बाँस मूल्य श्रृंखला से जुड़े नवाचार और अनुभव साझा करें

आरंभ करने की तिथि :
Dec 29, 2020
अंतिम तिथि :
Jan 31, 2021
23:45 PM IST (GMT +5.30 Hrs)
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युगों-युगों से बांस ग्रामीण भारत की जीवन रेखा रहा है। समय और ...

युगों-युगों से बांस ग्रामीण भारत की जीवन रेखा रहा है। समय और प्रौद्योगिकियों के विकास के साथ इसके नए तरीके के उपयोग से 'हरा सोना' किसान और उद्योग तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक जबर्दस्त गेम चेंजर बन गया है।

'वन' की परिभाषा से बांस को हटाने के लिए भारतीय वन अधिनियम में संशोधन सहित विभिन्न प्रगतिशील उपायों के साथ, 2018-19 में पुनर्गठित राष्ट्रीय बांस मिशन (NBM) शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य पूर्ण मूल्य श्रृंखला के विकास हेतु किसानों को बांस क्षेत्र से जोड़ने के लिए क्लस्टर विकास मोड में गुणवत्ता रोपण सामग्री, वृक्षारोपण, संग्रह के लिए सुविधाओं के सृजन, एकत्रीकरण, प्रसंस्करण, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों, कौशल विकास और ब्रांड निर्माण की पहल शुरू की गई।

'राष्ट्रीय बांस मिशन' किसानों, उद्यमियों, शोधकर्ताओं, बांस-आधारित उद्योग को अपने अनुभवों, नवाचारों, और उत्पादकता बढ़ाने के लिए अपनाई गई अच्छी प्रथाओं, उद्योग के लिए कच्चे माल की आपूर्ति को मजबूत करने, समकालीन बाजारों की मांग के मुताबिक उत्पादों को मजबूत करने के लिए आमंत्रित करता है। ताकि सिंगल यूज प्लास्टिक की जगह और नए युग का निर्माण में इसके इस्तेमाल को बढ़ावा मिले।

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SHARIF SHAIKH
SHARIF SHAIKH 5 साल 7 महीने पहले
पुष्पन के बाद बनने वाले बीज को एकत्रित और स्वच्छ किया जा सकता है। स्वच्छ बीजों को विशेष भंडारण तकनीकों जैसे नियंत्रित नभी, न्यूनतम तापमान आदि के द्वारा 6 माह या एक वर्ष से ज्यादा समय के लिए भंडारित किया जा सकता है। बाँस  बीजों को यदि बीज श्वसन, नियंत्रित तापमान अदि के लिए उचित वायु संचार के साथ भंडारण करके नहीं रखा जाता तो इसकी अकुरण क्षमता दो माह की अवधि के बाद धीरे-धीरे कम हो जाती है। अन्यथा बीज को संग्रहण के बाद तुरंत उगा देना चाहिए।
SHARIF SHAIKH
SHARIF SHAIKH 5 साल 7 महीने पहले
बाँस को लगाने की पारम्परिक विधियाँ बीज और उदभिज्ज तरीकों पर आधारित है। कुछ विशेष अवधि के दौरान बीज की उपलब्धता कम हो जाती है लेकिन बाँस-फूल (बम्बू फ्लावर) हर समय उपलब्ध रहता है। ज्यदातर बांस  के फूल 10 से लेकर 60 वर्ष से भी ज्यादा लंबे समय तक बने रहते हैं जो विभिन्न प्रजातियों पर निर्भर करते हैं। सामान्यतः चरणीय पुष्पण यूथवृति वाला हटा है और पुष्पण के बाद बाँस के सम्पूर्ण खिले हुए फूल समाप्त हो जाते हैं।
Aakashbharti
Aakashbharti 5 साल 7 महीने पहले
रेशम की खेती में बड़े पैमाने पर रेशम का इस्तेमाल किया जाता है ताकि पीछे के रेशम कीड़ा को गोली मार दी जा सके। रेशम के कीड़े को इसकी कोकून बनाने के लिए बाँस की चांडिकिका बनाई जाती थी। बांस से रेशम के कीड़ों को पालने के लिए और रेशम की मरोड़ को मोड़ने और रेशम की साड़ियों को बुनने जैसी कई अन्य गतिविधियों में कम लागत वाले शेडिंग शेड का निर्माण किया जा रहा था।किसान चाहते हैं कि बास कि खेती करे किसान की चिंता है कि बास कहां और कैसे बेची जाए बांस की खेती लाभ की खेती है या नहीं किसी कंपनी के साथ बात बेचने
kapil patidar_2
kapil patidar_2 5 साल 7 महीने पहले
किसान चाहते है कि बास कि खेती करे किसान की चिंता है कि बास कहां और कैसे बेचा जाए बांस की खेती लाभ की खेती है या नहीं किसी कंपनी के साथ बात बेचने का एग्रीमेंट भी कर ले और कंपनी कहीं भाग गई तो ऐसी स्थिति में बास को कहां बेचा जाएगा
Nagaraju H
Nagaraju H 5 साल 7 महीने पहले
Bamboo is extensively used in sericulture industry for making shoot to rear silk worm. bamboo chandirikas were made to facilitate the silk worm to make its cocoon. Low cost rearing sheds were being constructed to rear the silk worms with bamboo and in many other activities like silk reeling twisting and in weaving of silk saries.