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डिजिटल लॉकर सिस्टम की बीटा रिलीज

Beta release of Digital Locker System
आरंभ करने की तिथि :
Feb 09, 2015
अंतिम तिथि :
Apr 11, 2015
00:00 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
प्रस्तुतियाँ समाप्त हो चुके

डिजिटल लॉकर, डिजिटल भारत कार्यक्रम के तहत प्रमुख पहलों में से एक है। ...

डिजिटल लॉकर, डिजिटल भारत कार्यक्रम के तहत प्रमुख पहलों में से एक है। इसके बीटा संस्करण को इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी विभाग (डीईआईटीवाई) भारत सरकार, द्वारा 10 फ़रवरी 2015 को जारी किया गया है।

डिजिटल लॉकर का उद्देश्यमूल दस्तावेजों के उपयोग को कम करना और एजेंसियों में ई-दस्तावेजों के आदान-प्रदान को सक्षम करना है। ई-दस्तावेजों का आदान-प्रदान ऑनलाइन दस्तावेजों की प्रामाणिकता सुनिश्चित करने के लिए पंजीकृत संग्रहों के माध्यम से किया जाएगा। स्थानिक व्यक्ति भी अपने इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेजों को अपलोड कर सकते है और डिजिटल ई-साइन सुविधा का उपयोग कर उन पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। डिजिटल रुप से हस्ताक्षरित दस्तावेजों को सरकारी संगठनों या अन्य संस्थाओं के साथ साझा किया जा सकता है। डिजिटल लॉकर सिस्टम की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैः-

· स्थानिक व्यक्तियों को यूनिफ़ॉर्म रिसोर्स आइडेन्टिफायर (यूआरआई) के माध्यम से अपने दस्तावेजों का ऐक्सेस करने और ई-दस्तावेजों को सुरक्षित रूप से स्टोर करने के लिए डिजिटल लॉकर में 10 एमबी तक का निःशुल्क स्पेस।

· डिजिटल दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए ऑनलाइन ई-हस्ताक्षर सेवा।

स्थानिक व्यक्ति डिजिटल लॉकर सिस्टम के बीटा संस्करण का उपयोग करने और उस पर अपने सुझाव और प्रतिक्रिया साझा करने के लिए आमंत्रित हैं। डिजिटल लॉकर सिस्टम द्वारा प्रदान की जाने वाली अतिरिक्त सेवाओं के उपयोग के संबंध में भी आपके सुझाव आमंत्रित है।

डिजिटल लॉकर सिस्टम पर एक संकल्पना नोट संलग्न : http://cdn.mygov.nic.in/bundles/frontendgeneral/images/beta-release-of-digital-locker-system.pdf

ई हस्ताक्षर पर विवरणिका: http://cdn.mygov.nic.in/bundles/frontendgeneral/images/esign%E2%80%93Online-digital-signature-service.pdf

आप अपनी टिप्पणियां 10 अप्रैल 2015 तक भेज सकते हैं।

फिर से कायम कर देना
1433 सबमिशन दिखा रहा है
Niloy Nath
Niloy Nath 11 साल 7 महीने पहले
Sir, As it is evident that there is no control or monitoring over the actual no. of challans or fines which can be collected from rule violaters, I propose the same should be outsourced and should be given to private companies. The law is same for all and in case this is outsourced, the govt. can actually see how much money we have been loosing on till date, along with a huge improvement in the state of law and order in the country. Fines are some of the biggest revenue source in many countires
kevin jagani
kevin jagani 11 साल 7 महीने पहले
When a patient goes to a government hospital, he has to take his entire case history with him. Instead of this, what can be done is we can take the Aadhar card number of that particular patient and maintain a digital record for that number on an online system. In this way, we can create a nationalized database and the patient can be treated wherever in the country he may be, without the need to produce the case history.The doctor can easily download it based on the patients aadhar number.
AYUB KHAN M R
AYUB KHAN M R 11 साल 7 महीने पहले
dear Sir, Smart city k lie ek Plan ready kiya maine, Par o excel Sheet me rahene k karan ise attach nai Hora hai. Please kripaya aap Ek chance de dijiye taaki my apne idea ko apke samne present kar saku. 4 month se ready kiya is project ko. India ka har city smart city bansakta hai sirf 2 se 3 saal me. Sirf Ek Chance Chahiye. Please
SHANKAR LOKE
SHANKAR LOKE 11 साल 7 महीने पहले
भारत् की प्रशासनिक व्यवस्था ऐसी हॊ गयी है की आज् गरीब‌ आदमी कॊ न्याय‌ नही मिल रहा है. न्याय् मिलनॆ कॆ लियॆ वॊ अदालत‌ जाता है तॊ वॊ सत्र‌, उच्च, उच्चतम‌ न्यायालय‌ कॆ चक्कर‌ काटता रहता है आज‌ उच्चतम‌ न्यायालय‌ कॆ लियॆ उसॆ दिल्ली आना पडता है. गरीब‌ सॆ गरीब‌ कॊ भी न्याय‌ सरलता और् कम‌ सॆ कम‌ खर्च‌ मॆ मिलना चाहियॆ. मा. सुप्रीम‌ कॊर्ट कॆ दॊ या तीन‌ खडपीठ‌ हॊ तॊ दॆश‌ कॆ सभी कॊ नजदिक हि यह‌ व्यवस्था हॊ तॊ उसकॆ खर्च मॆ कुछ कमी हॊगी. छॊटि मुह‌ बडी बात‌ की है लॆकीन‌ गऱीब‌ कॆ लियॆ सत्ता का विकॆन्द्रिकरण हॊ
Naresh Betai
Naresh Betai 11 साल 7 महीने पहले
માનનીય મોદીજી, તમે દેશ માટે લોકોના મન ની વાતો સાંભળો છો અને તેની પ્રતિક્રીયાઓ પણ આપો છો – ઘણી સારી નિશાની છે દેશ ને પ્રગતિ ના પંથે અગ્રેસર કરવાની. પણ મારું આપ ને એક સૂચન છે કે અગાઉ જે તજજ્ઞો પોતાના મન ની વાત – દેશ ના હિત માટે કરી ગયા છે તે બિલકુલ અવગણવા જેવી નથી. હું મારી વાત ને ટૂંકાવતા કહું તો , તમોશ્રી માત્ર શ્રી નારાયણમૂતિઁ એ લખેલ અને હેતલ સોંદરવા એ અનુવાદ કરેલ પુસતક - નહીં માફ નીચું નિશાન - (A Better India, A Better World) - અચૂક થી વાંચી જશોજી. આભાર. નરેશ બેટાઈ – વડોદરા.
Tarun Krishnaswamy
Tarun Krishnaswamy 11 साल 7 महीने पहले
For the immediate Notice of P.M. Influential person of a locality construct small and medium size worship places centred at major local roads. No local authorities object such activities due to vote bank. In due course these places get huge donations which are unaccounted. Public faces lot of problem and no one dares to intervene. Kindly take immediate actions in this matter.
ramesh rajdar
ramesh rajdar 11 साल 7 महीने पहले
यदि कक्षा 6 से 8 तक के बच्चों की मान्यता अलग हो जाय तो बोर्ड परीक्षा के दौरान कक्षा 6 से 8 तक के बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो और उनका कोर्स भी आसानी से पूरा किया जा सकता है ! यानि जूनियर हाई स्कूल और इण्टर कॉलेज की मान्यता अलग किया जाना परम आवश्यक है ! तभी इस कोढ़ से मुक्ति मिल सकती है और बच्चों का भविष्य तभी सवंर सकता है ! मेरे मन की बात यही है कि शिक्षा के गिरते स्तर और उसके ब्यवसायीकरण को रोकना अतिआवश्यक है ! प्रधानमन्त्री जी, स्कूली बच्चों से आपके मन की बात करने का उद्देश्य तभी पूर्ण हो सकेगा !
ramesh rajdar
ramesh rajdar 11 साल 7 महीने पहले
माह में तिमाही परीक्षा ली जाती है और माह दिसंबर में छः माही परीक्षा ली जाती है और फिर जनवरी और फरवरी में वार्षिक परीक्षा संपन्न हो जाती है ! अब इस सिलेबस को देखने और समझने से स्पष्ट है कि बिना कोर्स पूरा किये ही कक्षा 6 से 8 तक के छात्र व छात्राओं की परीक्षा लेकर उसके कैरियर को दीमक की तरह खोखला करने का घृणित कार्य शिक्षण संस्थाओं द्वारा किया जा रहा है ! इसका सबसे प्रमुख कारण शासन स्तर से कक्षा 6 से 12 तक की मान्यता को एक साथ देना है !