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गुणवत्ता के लिए अभिशासन सुधार

Governance reforms for quality
आरंभ करने की तिथि :
Jan 22, 2015
अंतिम तिथि :
Nov 01, 2015
00:00 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
प्रस्तुतियाँ समाप्त हो चुके

इस विषय पर राज्य विश्वविद्यालयों और केन्द्र वित्तपोषित संस्थाओं ...

इस विषय पर राज्य विश्वविद्यालयों और केन्द्र वित्तपोषित संस्थाओं में बेहतर अभिशासन ढांचा बनाने हेतु विभिन्न प्रकार के अपेक्षित सुधारों, जो उनकी शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार लाने में सहायक हों, के लिए सुझाव आमंत्रित किए जाते हैं।

फिर से कायम कर देना
918 सबमिशन दिखा रहा है
Arun Kumar Gupta
Arun Kumar Gupta 11 साल 5 महीने पहले
विद्यार्थी ही भावी समाज का कर्णधार होता है। गुरुजन बन्धुओं को चाहिए कि सबसे पहले विद्यार्थियों को शिष्टाचार का व्यावहारिक पहलू मजबूत करें ! ‘सत्यं बद्; धर्मं चर ! (सत्य बोलें और धर्म पर रहें-चलें !)’ अध्ययन का मूलमन्त्र होना चाहिये । इसकी व्यावहारिकता पर सबसे कड़ी दृष्टि होनी चाहिये । http://vidyatattvam-paddhati.blogspot.in/
Arun Kumar Gupta
Arun Kumar Gupta 11 साल 5 महीने पहले
अध्ययन-अध्यापन और ज्ञान पर ही समाज का पूरा भविष्य आधारित है। अध्ययन-अध्यापन और ‘ज्ञान’ समाज सुधार और जीवोद्धार तथा सुखी-सम्पन्न समाज हेतु सर्वप्रथम सबसे महत्त्वपूर्ण एवं सभी के लिए ही एक अनिवार्यतः आवश्यक विधान है ।http://vidyatattvam-paddhati.blogspot.in/
Reena Jain
Reena Jain 11 साल 5 महीने पहले
Dear Prime Minister Sir, I recently heard the news of government buying new fighters from France. I must say a very good decision. But I will like to bring to you notice that HAL is actually fooling you sir. They have the worst work culture and standards which makes us heavily dependent on imports. Its the right time to take hard decision to bring best HR practices to HAL so that they can deliver something of good quality on Time. We can take lessons from Russia and china on this. Regards.
Nepal Singh Patel
Nepal Singh Patel 11 साल 5 महीने पहले
शिक्षा (Education); स्वाध्याय ;(Self Realization); योग-साधना अथवा अध्यात्म ;(Spiritualization) और तत्त्वज्ञान (True, supreme & Perfect KNOWLEDGE रूप भगवद्ज्ञान रूप सत्यज्ञान रूप सम्पूर्णज्ञान सम्पूर्ण की उपलब्धि कराने वाली हो-- उपर्युक्त प्रकार से ही हो।
Nepal Singh Patel
Nepal Singh Patel 11 साल 5 महीने पहले
शिक्षा-दीक्षा तभी पूर्ण-सम्पूर्ण मानी जायेगी जबकि क्रमशः घर-परिवार-सम्पदा से युक्त संसार की; इन्द्रियों और उसके क्रियाओं-भोगों से युक्त शरीर की; अस्तित्त्व और क्रिया-उपलब्धियों से युक्त जीव-रूह-सेल्फ की; अस्तित्त्व और क्रिया-उपलब्धियों से युक्त आत्मा-ईश्वर-ब्रम्ह- नूर-सोल-ज्योतिर्बिन्दु रूप शिव की और मुक्ति-अमरता सहित सम्पूर्ण की सम्पूर्णतया उपलब्धि कराने वाला परमात्मा-परमेश्वर- परमब्रम्ह-खुदा- गाॅड-भगवान् की प्राप्ति-उपलब्धि कराने की बात-चीत सहित साक्षात् दर्शन कराने वाली क्रमशः जानकारिया
Nepal Singh Patel
Nepal Singh Patel 11 साल 5 महीने पहले
शिक्षा-दीक्षा सम्पूर्ण की सम्पूर्णतया जानकारी कराने वाली होनी-रहनी चाहिये तभी ही दोष मुक्त सत्य प्रधान सुदृढ़-सम्पन्न अमन-चैन का भरा-पूरा समाज कायम हो-रह सकता है । यही सत्य है और इसी को ही पुर्णतः व्यावहारिक बनाने होने-रहने की अनिवार्यतः आवश्यकता है। इसे हर किसी को अपनाना ही चाहिये-- अपनाना ही पड़े़ेगेगा-- पड़े़ेगेगा ही । क्या ही अच्छा होतेता कि सहज ही इसे सोचेच-समझ देख-परख कर ही सही मगर सरकार द्वारा अपना लिया जाता और समाज पर इसे प्रभावी तरीके से हर किसी के लिए अनिवार्य कर-करा दिया जाता |
Khushbu Mehta
Khushbu Mehta 11 साल 5 महीने पहले
Also, the exam centers shall be provided according to the residential area. During exams, students as well as parents are paranoid not only about the exams but regarding the means of reaching the center!!! There are always cases of students fainting as they travel in peak hours in trains to reach their centers.An examination process shall be made convenient to students. These hurdles just adds to the exam fear and affects performance of students. As PM says small steps, big difference.