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Role of parents in furthering education for daughters

Role of parents in furthering education for daughters
Start Date :
Jan 01, 2015
Last Date :
Jul 17, 2015
04:15 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
Submission Closed

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What is the role of parents in furthering education for daughters? Do you think a broader and more equal outlook among parents would help more daughters to go to school?

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Showing 8190 Submission(s)
Puneet Shukla
Puneet Shukla 11 years 6 months ago
इसलिए यह राष्ट्रहित में होगा कि भारत ठीक उसी प्रकार से विश्व के सभी हिन्दूओं को अपने देश की नागरिकता दे जैसे इजराइल ने विश्व के सभी यहुदियों को इजराइल की नागरिकता प्रदान की है ताकि विश्व के तमाम हिन्दू अपने को अनाथ और असुरक्षित अनुभव न करे व भारत से एकत्व अनुभव कर भारत के हित में कार्य करने को प्रेरित हो ।
Puneet Shukla
Puneet Shukla 11 years 6 months ago
विश्व में जो-जो भी भारत राष्ट्र के नागरिक है वे भारत के हित में ही सोचेगा, चाहे वो नागरिक किसी भी देश का हो किन्तु सत्य यह भी है कि इस भारतीय राष्ट्र की भावना केवल हिन्दू में ही हो सकती है क्योंकि एक तो वह बहुसंख्यक है दूसरा उसका मूल उद्भव भारत है ।
Puneet Shukla
Puneet Shukla 11 years 6 months ago
(अपना देश वो है जिसमें व्यक्ति निवास करता है, अपना राष्ट्र वो है जिससे व्यक्ति एकत्व व लगाव अनुभव करता है बेशक वो उस देश का निवासी न हो ) । कुछ दिन पूर्व ही स्वतंत्रता दिवस पर सारे राष्ट्र ने देखा कि सुनिता विलियम, जो भारत देश की नागरिक नहीं है, ने अंतरिक्ष में तिरंगा फहराया । ऐसा इसलिए हुआ कि सुनिता विलियम भले ही भारत देश की नागरिक नहीं है न ही उसका जन्म भारत में हुआ है, लेकिन फिर भी वह भारत राष्ट्र की आज भी नागरिक है ।
Puneet Shukla
Puneet Shukla 11 years 6 months ago
इजराइल के विपरीत भारत ने इतिहास से कोई सबक नहीं लिया । यह सर्वविदित और अकाल सत्य है कि जो स्वभाविक लगाव बहुसंख्यक को "अपने राष्ट्र" से होता है वह स्वभाविक लगाव किसी अल्पसंख्यक को "अपने देश" से नहीं हो सकता । इस आधर पर एक हिन्दू, चाहे वह विश्व में कहीं भी रहता है, जिस लगाव एक अनुभव अपने भारत राष्ट्र के साथ करता है, वैसा अनुभव कोई गैर-हिन्दू अपने देश से नहीं कर सकता ।
Puneet Shukla
Puneet Shukla 11 years 6 months ago
दूसरी तरफ इजराइली राष्ट्र की रक्षा हेतु इजराइल ने न केवल अपने गौरवमयी इतिहास व धरोहर को पुनः संजोया, हिब्रु भाषा का पुनरुथान किया अपितु जो सबसे महत्वपूर्ण कदम उठाया वह यह था-" विश्व के सभी यहुदियों को इजराइल की नागरिकता देना" । इजराइल के इस महर्वपूर्ण कदम ने विश्व के सभी यहुदियों को एक राष्ट्र के रुप में एकत्व की भावना से भर दिया । इस समय स्थिति यह है कि यहुदी चाहे किसी देश में निवास करता हो, इजराइल के हित में काम करता है ।
Puneet Shukla
Puneet Shukla 11 years 6 months ago
सस्कॄति व भाषा का संरक्षण सुनिश्चित करने के साथ-साथ इजराइली राज्य व इजराइली राष्ट्र दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित क���ने का पूरा-पूरा प्रयास किया । जहां इजरायली राज्य की सुरक्षा का प्रश्न था वहां इजराइल ने जीरो-टोलरेन्स की नीति का अनुसरण किया जिसमें इजराइल ने विश्व में जहां भी आत्मअस्तित्व का खतरा महसूस हुआ, आक्रमण की पहल करने में जरा भी देरी नहीं की ।
Puneet Shukla
Puneet Shukla 11 years 6 months ago
स्वतंत्रता के बाद इजराइल के प्रथम प्रधान मन्त्री ने शिक्षाविदों की बैठक में पूछा कि हिब्रु भाषा को स्थापित करने मे कितना समय लगेगा । कम से कम पांच साल तो लग ही जाएंगे, शिक्षाविदों ने जवाब दिया । यह समझ लो कि आज पांच वर्ष पूरे हो गए है, इसलिए आज से ही हिब्रु का अमल में लाया जाए- प्रधानमन्त्री ने कहा । और उसी दिन से इजराइल में ���िब्रु लागू हो गई ।
Puneet Shukla
Puneet Shukla 11 years 6 months ago
भारत और इजराइल की इतनी समानता होने के बावजूद वर्तमान में दोनों में एक प्रमुख भिन्नता उभर कर सामने आई है और वो यह कि जहां इजराइल ने इतिहास से सबक सीखा है वहीं भारत ने इतिहास से जरा भी सबक नहीं लिया । पुनः स्वतंत्रता के बाद इजराइल ने "यदि जिन्दा रहोगे, तो ही लड पाएंगे "नीति को आत्मसात करते हुए इसका अक्षरतः पालन किया है । इसके साथ ही उसने अपनी प्राचीन संस्कृति व हिब्रु भाषा के पुनरुथान के लिए भी कडे निर्णय लिए है ।
Puneet Shukla
Puneet Shukla 11 years 6 months ago
जहां इजराइल को अपने मूल के छोटे से टुकडे से संतोष करना पडा वहीं आर्यवर्त से ब्रह्मा, पुर्वी व पश्चिमी पाकिस्तान, जो संसाधनो व सामरिक दृष्ति से अत्यंत मह्त्वपूर्ण र्हे, गवाने पडे । यह वो कीमत थी जो दोनों प्राचीनतम व महानतम सभ्यताओं को केवल और केवल इसलिए चुकानी पडी कि उन्होंने सामर्थ्य होते हुए भी अपने देश की सुरक्षा का ध्यान नहीं दिया
Puneet Shukla
Puneet Shukla 11 years 6 months ago
हिन्दू व यहुदी, दोनों समाजो ने समान गलतियां की कि दोनों ने देश की रक्षा की ओर ध्यान नहीं दिया । परिंणाम भी समान ही रहे, दोनों देश विदेशी आक्रान्ताओं द्वारा अधिगॄहीत कर लिए गए । समय ने दुबारा करवट बदली, द्वितीय विश्व युद्ध हुआ और दोनों देश व समाज को पुनः मुक्ति का अवसर मिला । यद्यपि दोनों देश अपने मूल स्वरूप व आकार में नहीं थे ।