Yogi_1
11 years 5 months ago
अध्ययन-अध्यापन और ज्ञान पर ही समाज का पूरा भविष्य आधारित है।
अध्ययन-अध्यापन और ‘ज्ञान’ समाज सुधार और जीवोद्धार तथा सुखी-सम्पन्न समाज हेतु सर्वप्रथम सबसे महत्त्वपूर्ण एवं सभी के लिए ही एक अनिवार्यतः आवश्यक विधान है ।
ईमान-सच्चाई-संयम-सेवा अनिवार्य होना चाहिये !
विद्या को कभी भी व्यावसायिक नहीं अपितु लक्ष्यमूलक व्यावहारिक ही होना चाहिए । यह तब ही सम्भव है जब कि ‘पिण्ड और ब्रह्माण्ड’ की यथार्थतः जानकारी के साथ ही दोनों में आपस में ताल-मेल सन्तुलन बने-बनाये रहने वाला ही हो |
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