Home | MyGov

Accessibility
Accessibility Tools
Color Adjustment
Text Size
Navigation Adjustment
Screen Reader iconScreen Reader

Engagement with industry to link education to employability

Engagement with industry to link education to employability
Start Date :
Jan 22, 2015
Last Date :
Nov 01, 2015
00:00 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
Submission Closed

Employability of our students is a matter of concern. At the other end of the spectrum is need for greater investment in research. Industry academia linkages are essential to meet ...

Employability of our students is a matter of concern. At the other end of the spectrum is need for greater investment in research. Industry academia linkages are essential to meet both these ends. While we have various efforts in this direction, these have not fructified as expected. We need to find out how and what is needed for a more fruitful partnering.

Reset
Showing 875 Submission(s)
Yogi_1
Yogi_1 11 years 5 months ago
अध्ययन-अध्यापन और ज्ञान पर ही समाज का पूरा भविष्य आधारित है। अध्ययन-अध्यापन और ‘ज्ञान’ समाज सुधार और जीवोद्धार तथा सुखी-सम्पन्न समाज हेतु सर्वप्रथम सबसे महत्त्वपूर्ण एवं सभी के लिए ही एक अनिवार्यतः आवश्यक विधान है । ईमान-सच्चाई-संयम-सेवा अनिवार्य होना चाहिये ! विद्या को कभी भी व्यावसायिक नहीं अपितु लक्ष्यमूलक व्यावहारिक ही होना चाहिए । यह तब ही सम्भव है जब कि ‘पिण्ड और ब्रह्माण्ड’ की यथार्थतः जानकारी के साथ ही दोनों में आपस में ताल-मेल सन्तुलन बने-बनाये रहने वाला ही हो |
Ankit Kumar_20
Ankit Kumar_20 11 years 5 months ago
शिशुओं के भविष्य की सारी जिम्मेदारी सरकार की होनी चाहिए । शिशु एक सच्चा, ईमानदार, त्यागी, सन्तोषी, सरकार के प्रति वफादार, सत्यभाषी एवं सदाचारी धार्मिक एवं वीर सत्पुरुष बने तथा शिशुओं का भविष्य अन्धकारमय कदापि न होने पावे, सदा ही उज्जवल बने-बना रहे ।
Ankit Kumar_20
Ankit Kumar_20 11 years 5 months ago
अध्ययन-अध्यापन और ज्ञान पर ही समाज का पूरा भविष्य आधारित है। अध्ययन-अध्यापन और ‘ज्ञान’ समाज सुधार और जीवोद्धार तथा सुखी-सम्पन्न समाज हेतु सर्वप्रथम सबसे महत्त्वपूर्ण एवं सभी के लिए ही एक अनिवार्यतः आवश्यक विधान है । ईमान-सच्चाई-संयम-सेवा अनिवार्य होना चाहिये ! विद्या को कभी भी व्यावसायिक नहीं अपितु लक्ष्यमूलक व्यावहारिक ही होना चाहिए । यह तब ही सम्भव है जब कि ‘पिण्ड और ब्रह्माण्ड’ की यथार्थतः जानकारी के साथ ही दोनों में आपस में ताल-मेल सन्तुलन बने-बनाये रहने वाला ही हो |
Ankit Kumar_20
Ankit Kumar_20 11 years 5 months ago
विद्या को कभी भी व्यावसायिक नहीं अपितु लक्ष्यमूलक व्यावहारिक ही होना चाहिए । यह तब ही सम्भव है जब कि ‘पिण्ड और ब्रह्माण्ड’ की यथार्थतः जानकारी के साथ ही दोनों में आपस में ताल-मेल सन्तुलन बने-बनाये रहने वाला ही हो |
Ankit Kumar_20
Ankit Kumar_20 11 years 5 months ago
शिशुओं के भविष्य की सारी जिम्मेदारी सरकार की होनी चाहिए । शिशु एक सच्चा, ईमानदार, त्यागी, सन्तोषी, सरकार के प्रति वफादार, सत्यभाषी एवं सदाचारी धार्मिक एवं वीर सत्पुरुष बने तथा शिशुओं का भविष्य अन्धकारमय कदापि न होने पावे, सदा ही उज्जवल बने-बना रहे ।
Sakshi_10
Sakshi_10 11 years 5 months ago
अध्ययन-अध्यापन और ज्ञान पर ही समाज का पूरा भविष्य आधारित है। अध्ययन-अध्यापन और ‘ज्ञान’ समाज सुधार और जीवोद्धार तथा सुखी-सम्पन्न समाज हेतु सर्वप्रथम सबसे महत्त्वपूर्ण एवं सभी के लिए ही एक अनिवार्यतः आवश्यक विधान है । ईमान-सच्चाई-संयम-सेवा अनिवार्य होना चाहिये ! विद्या को कभी भी व्यावसायिक नहीं अपितु लक्ष्यमूलक व्यावहारिक ही होना चाहिए । यह तब ही सम्भव है जब कि ‘पिण्ड और ब्रह्माण्ड’ की यथार्थतः जानकारी के साथ ही दोनों में आपस में ताल-मेल सन्तुलन बने-बनाये रहने वाला ही हो |
Sakshi_10
Sakshi_10 11 years 5 months ago
विद्या को कभी भी व्यावसायिक नहीं अपितु लक्ष्यमूलक व्यावहारिक ही होना चाहिए । यह तब ही सम्भव है जब कि ‘पिण्ड और ब्रह्माण्ड’ की यथार्थतः जानकारी के साथ ही दोनों में आपस में ताल-मेल सन्तुलन बने-बनाये रहने वाला ही हो |
Sakshi_10
Sakshi_10 11 years 5 months ago
शिशुओं के भविष्य की सारी जिम्मेदारी सरकार की होनी चाहिए । शिशु एक सच्चा, ईमानदार, त्यागी, सन्तोषी, सरकार के प्रति वफादार, सत्यभाषी एवं सदाचारी धार्मिक एवं वीर सत्पुरुष बने तथा शिशुओं का भविष्य अन्धकारमय कदापि न होने पावे, सदा ही उज्जवल बने-बना रहे ।
Milan Kumar_2
Milan Kumar_2 11 years 5 months ago
शिशुओं के भविष्य की सारी जिम्मेदारी सरकार की होनी चाहिए । शिशु एक सच्चा, ईमानदार, त्यागी, सन्तोषी, सरकार के प्रति वफादार, सत्यभाषी एवं सदाचारी धार्मिक एवं वीर सत्पुरुष बने तथा शिशुओं का भविष्य अन्धकारमय कदापि न होने पावे, सदा ही उज्जवल बने-बना रहे ।